अयोध्या के पवित्र स्थल: मन्दिर, घाट एवं तीर्थ स्थान
अयोध्या के आठ प्रमुख पवित्र स्थलों का तीर्थयात्रा-मार्गदर्शक: रामकोट, हनुमान गढ़ी, कनक भवन, नागेश्वरनाथ, सरयू नदी, मणि पर्बत, तुलसीदास भवन, एवं गुरुद्वारे। प्रत्येक स्थल का अपना सम्पूर्ण पृष्ठ है, जिसमें इतिहास, कथाएँ, पर्व एवं दर्शन-सूचना सम्मिलित है।
अयोध्या सब से पहले मन्दिरों की नगरी है। पश्चिम में रामकोट के उच्च दुर्ग से लेकर उत्तर में सरयू के शान्त घाटों तक, प्राचीन नगर का प्रत्येक भाग रामायण की किसी न किसी घटना से अथवा यहाँ साधनारत किसी सन्त से बँधा हुआ है। नीचे वर्णित आठ स्थल, अर्थात् सात हिन्दू मन्दिर एवं ऐतिहासिक गुरुद्वारों का समूह, मिलकर अयोध्या की पारम्परिक तीर्थयात्रा (यात्रा) का चक्र बनाते हैं।
प्रत्येक स्थल का इस वेबसाइट पर अपना समर्पित पृष्ठ है, जिसमें पूर्ण इतिहास, पौराणिक कथाएँ, पर्व-सूचना एवं दर्शन-मार्गदर्शन है। यह परिचय-पृष्ठ एक मानचित्र मात्र है।
तीर्थयात्रा का पारम्परिक क्रम
शताब्दियों से अनुसरण किया जाने वाला पारम्परिक क्रम पहले हनुमान, फिर श्रीराम, और तत्पश्चात् सरयू स्नान से प्रारम्भ होता है:
- हनुमान गढ़ी: परम्परा के अनुसार, श्रीराम के दर्शन से पूर्व सेवक हनुमान को प्रणाम करना अनिवार्य है।
- रामकोट: वह उच्चभूमि दुर्ग जिस पर नवीन राम जन्मभूमि मन्दिर स्थित है।
- कनक भवन: सीता एवं राम का “स्वर्ण भवन”, रामकोट से कुछ ही मिनटों की पैदल दूरी पर।
- नागेश्वरनाथ: प्राचीन शिव मन्दिर, जिसकी स्थापना भगवान राम के पुत्र कुश ने की मानी जाती है।
- सरयू: राम की पैड़ी अथवा नया घाट पर स्नान, तथा सायंकालीन सरयू आरती।
- तुलसीदास भवन: गोस्वामी तुलसीदास का स्मारक, जहाँ प्रतिदिन सायं निःशुल्क रामलीला का मञ्चन होता है।
- मणि पर्बत: वह छोटा पर्वत जहाँ, कथा के अनुसार, सञ्जीवनी पर्वत का एक खण्ड गिरा था।
- सिख गुरुद्वारे: गुरु नानक देव जी, गुरु तेग बहादुर जी, एवं गुरु गोबिन्द सिंह जी के अयोध्या आगमन के स्मारक।
एक श्रद्धालु इस सम्पूर्ण चक्र को एक ही दिन में पूर्ण कर सकता है; अधिकांश दर्शनार्थी दो दिनों में मन्दिर-समूह (1–4) तथा नदी-एवं-सन्त समूह (5–8) में विभाजित करना उचित मानते हैं।
प्रत्येक पृष्ठ पर क्या मिलेगा
इस मार्गदर्शिका का प्रत्येक स्थल-पृष्ठ एक ही संरचना का अनुसरण करता है, जिससे आप अपनी आवश्यकता के अनुभाग पर शीघ्र पहुँच सकें:
- इतिहास एवं उद्गम: मन्दिर की स्थापना कब, किसने की, तथा शिलालेख एवं गज़ेटियर क्या अभिलेख रखते हैं।
- पौराणिक कथाएँ एवं शास्त्रीय आधार: वाल्मीकि रामायण, रामचरितमानस, स्कन्द पुराण की वे घटनाएँ अथवा स्थानीय परम्पराएँ जिन्हें यह स्थल जीवित रखता है।
- आज वहाँ क्या है: वास्तुकला, मुख्य देवमूर्ति, सहायक मन्दिर।
- पर्व: स्थल कब अपने सर्वाधिक सक्रिय रूप में होता है (उदा. रामकोट पर राम नवमी, कनक भवन में विवाह पञ्चमी, नागेश्वरनाथ में महाशिवरात्रि, सरयू तट पर दीपोत्सव, मणि पर्बत पर सावन झूला मेला)।
- दर्शन: समय, वेश-भूषा नियम, सुगमता-सूचना, तथा वहाँ कैसे पहुँचें।
प्रथम बार के दर्शनार्थियों के लिए व्यावहारिक सूचना
- प्राचीन अयोध्या का हृदय सघन है: हनुमान गढ़ी, रामकोट, कनक भवन, तथा प्रसाद विक्रेताओं से सजी बाज़ार-गलियाँ सब पैदल दूरी पर हैं।
- सरयू के घाट लगभग 6 कि.मी. तक नदी के दक्षिणी तट पर फैले हैं: राम की पैड़ी से लेकर गुप्तार घाट तक, जहाँ कथा के अनुसार भगवान श्रीराम सरयू में प्रवेश कर वैकुण्ठ धाम लौटे थे।
- मणि पर्बत एवं तुलसीदास भवन मुख्य मन्दिर-समूह से थोड़ी दूरी पर हैं: ऑटो से जाना सर्वोत्तम है।
- अयोध्या नवीन महर्षि वाल्मीकि अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (15 कि.मी.) तथा अयोध्या धाम जंक्शन रेलवे स्टेशन (रामकोट से 2 कि.मी.) से भलीभाँति जुड़ी है।
- विशेष रूप से राम मन्दिर के दर्शन हेतु: समय, प्रवेश पास एवं वेश-भूषा के लिए: समर्पित दर्शन मार्गदर्शिका देखें।
नीचे प्रत्येक स्थल का परिचय देखें।
प्रत्येक स्थल का परिचय
किसी भी कार्ड पर क्लिक कर पूर्ण मार्गदर्शिका देखें: इतिहास, कथाएँ, पर्व एवं दर्शन-सूचना। (विस्तृत पृष्ठ अंग्रेज़ी में उपलब्ध।)
रामकोट
वह प्राचीन दुर्ग जिस पर नवीन राम जन्मभूमि मन्दिर निर्मित है। अयोध्या का प्रमुख पूजा-स्थल, विशेषतः राम नवमी पर।
हनुमान गढ़ी
18वीं शताब्दी का सेवक हनुमान का दुर्ग-मन्दिर, गर्भगृह तक 76 सीढ़ियाँ, तथा बाल हनुमान को गोद में लिए अंजनी माता की प्रतिमा।
कनक भवन
"स्वर्ण भवन": राम एवं सीता का मन्दिर-संग्रहालय, जिसे कैकेयी ने सीता को विवाह उपहार स्वरूप भेंट किया, ऐसी मान्यता है।
नागेश्वरनाथ
भगवान राम के पुत्र कुश द्वारा स्थापित प्राचीन शिव मन्दिर। वह मन्दिर जिसने विक्रमादित्य को अयोध्या पुनः खोजने में सहायता की।
सरयू नदी
अयोध्या की पवित्र नदी: दैनिक स्नान, भव्य दीपोत्सव, सायंकालीन आरती, तथा भगवान श्रीराम के वैकुण्ठ-गमन का स्थान।
मणि पर्बत
रामायण के अनुसार वह पर्वत, जहाँ हनुमान द्वारा लक्ष्मण को बचाने हेतु ले जाई जा रही सञ्जीवनी जड़ी-बूटी पर्वत का एक खण्ड गिर गया था।
तुलसीदास भवन
रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास को समर्पित स्मारक एवं शोध संस्थान। प्रतिदिन सायं 6–9 बजे निःशुल्क रामलीला प्रदर्शन।
सिख गुरुद्वारे
गुरु नानक देव जी, गुरु तेग बहादुर जी, एवं गुरु गोबिन्द सिंह जी के अयोध्या आगमन: और उनकी स्मृति में बने गुरुद्वारे।