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श्री राम जन्मभूमि
नागेश्वरनाथ शिव मन्दिर, अयोध्या: भगवान राम के पुत्र कुश द्वारा स्थापित माना जाता है

नागेश्वरनाथ मन्दिर, अयोध्या: कुश द्वारा स्थापित, भगवान राम के पुत्र का मन्दिर

अयोध्या के नागेश्वरनाथ शिव मन्दिर का सम्पूर्ण परिचय: भगवान राम के पुत्र कुश द्वारा स्थापित, नाग-कन्या की कथा, राजा विक्रमादित्य द्वारा अयोध्या की पुनः खोज, और यहाँ मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि।

नागेश्वरनाथ मन्दिर अयोध्या के सर्वाधिक प्राचीन सक्रिय तीर्थों में से एक है। यह शिव-मन्दिर नगर की पौराणिक कथाओं में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। कहा जाता है कि इसकी स्थापना भगवान राम के ज्येष्ठ पुत्र कुश ने महाराज की राज्य-समाप्ति के पश्चात् की थी। मन्दिर सरयू के निकट है और अयोध्या की अन्तर्गृही परिक्रमा का पारम्परिक आरम्भ-स्थान है।

कुश और नाग-कन्या की कथा

स्कन्द पुराण और निरन्तर चली आ रही स्थानीय परम्परा के अनुसार, इस मन्दिर की उत्पत्ति-कथा अयोध्या की सर्वाधिक प्रिय कथाओं में से एक है:

सरयू में स्नान करते समय राजकुमार कुश का अंगद (बाजूबन्द) नदी में गिर गया। एक नाग-कन्या ने उसे ढूँढकर वापस किया। वह युवा राजकुमार पर मोहित हो गई। किन्तु वह स्वयं शिव-भक्त होने के कारण इस मोह पर कुछ नहीं कर सकती थी; उसने कुश से प्रार्थना की कि वे नगर में इस स्थान पर शिव-मन्दिर बनवाएँ। कुश उसकी भक्ति से प्रभावित हुए और उन्होंने ऐसा ही किया, वही मन्दिर आज नागेश्वरनाथ के रूप में विद्यमान है।

विक्रमादित्य की पुनः खोज

मन्दिर का पौराणिक महत्त्व एक आश्चर्यजनक ऐतिहासिक दावे से भी जुड़ा है। गज़ेटियर परम्परा में संरक्षित अभिलेखों के अनुसार, महाराज विक्रमादित्य (परम्परानुसार प्रथम शताब्दी ईसा पूर्व) के समय जब शेष अयोध्या खण्डहर हो गई थी और घने जंगल से ढक गई थी, तब केवल यही मन्दिर बचा रहा।

जब विक्रमादित्य ने अपने पूर्वजों की आस्था की खोई हुई राजधानी की खोज आरम्भ की, तो इसी खड़े नागेश्वरनाथ मन्दिर ने उन्हें अयोध्या का सटीक स्थान और उसके अन्य तीर्थों का निर्धारण करने में सहायता की। तत्पश्चात् नगर का पुनर्निर्माण इसी के चारों ओर हुआ।

महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि, शिव की महारात्रि, जो फाल्गुन (फरवरी-मार्च) में मनाई जाती है, नागेश्वरनाथ का सर्वोच्च उत्सव है। लाखों भक्त रात भर अभिषेक करने आते हैं, निरन्तर ॐ नमः शिवाय का जाप होता है और शिवलिंग पर बिल्वपत्र अर्पित किए जाते हैं।

दर्शन

  • समय: लगभग प्रातः 4:30 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक; सोमवार (शिव का दिन) और श्रावण मास (जुलाई-अगस्त) में अधिक समय।
  • श्रावण के सोमवार को सावन सोमवार अभिषेक के लिए विशेष रूप से भीड़ रहती है।
  • मन्दिर अन्तर्गृही परिक्रमा मार्ग पर है: इस लघु परिक्रमा के श्रद्धालु यहीं से प्रारम्भ और समाप्त करते हैं।
  • फ़ोटोग्राफी: बाहरी प्रांगण में अनुमति है।

समीपवर्ती स्थल

सरयू · रामकोट · हनुमान गढ़ी · कनक भवन

स्रोत एवं सन्दर्भ

  • स्कन्द पुराण, अयोध्या माहात्म्य
  • फैज़ाबाद ज़िला गज़ेटियर
  • स्थानीय मन्दिर-शिलालेख एवं मौखिक परम्परा

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