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श्री राम जन्मभूमि
तुलसी स्मारक भवन, अयोध्या: रामचरितमानस के रचयिता कवि-सन्त गोस्वामी तुलसीदास का स्मारक

तुलसी स्मारक भवन, अयोध्या: गोस्वामी तुलसीदास का स्मारक

अयोध्या के तुलसी स्मारक भवन का सम्पूर्ण परिचय: 16वीं शताब्दी के कवि-सन्त गोस्वामी तुलसीदास का स्मारक, रामचरितमानस के रचयिता, यहाँ प्रतिदिन आयोजित रामलीला और शोध-संस्थान की जानकारी।

तुलसी स्मारक भवन (सामान्यतः तुलसीदास भवन) अयोध्या में गोस्वामी तुलसीदास (लगभग 1532-1623 ई.) को समर्पित स्मारक है। ये 16वीं शताब्दी के कवि-सन्त थे जिनका रामचरितमानस संस्कृत की वाल्मीकि रामायण के साथ उत्तर भारत का सर्वाधिक प्रिय और पठित भक्ति-काव्य है। रामचरितमानस के अतिरिक्त तुलसीदास ने विनय पत्रिका, कवितावली और अत्यन्त प्रिय हनुमान चालीसा की भी रचना की।

रामचरितमानस के कवि

तुलसीदास ने रामचरितमानस की रचना अवधी भाषा में, अर्थात् अयोध्या क्षेत्र की स्थानीय बोली में, 1574 ई. में अयोध्या में ही, राम नवमी के दिन आरम्भ की थी। उन्होंने संस्कृत के स्थान पर जान-बूझकर अवधी को चुना: वे चाहते थे कि राम की कथा केवल पण्डितों तक सीमित न रहे, बल्कि कृषक, सैनिक, गृहिणी, अर्थात् अयोध्या, काशी और अवध की गलियों में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचे।

रामचरितमानस उत्तर भारत और प्रवासी भारतीय समुदाय के करोड़ों घरों में प्रतिदिन पढ़ी जाती है; इसके दोहे विद्यालय में कण्ठस्थ किए जाते हैं और बातचीत में उद्धृत होते हैं। हनुमान चालीसा, जो प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को असंख्य भक्तों द्वारा पढ़ी जाती है, पृथ्वी पर सर्वाधिक बोले जाने वाले भक्ति-ग्रन्थों में से एक है।

आज भवन में

तुलसी स्मारक भवन की स्थापना उत्तर प्रदेश सरकार ने 1969 में अयोध्या से तुलसीदास के सम्बन्ध को सम्मान देने के लिए की थी। यह तीन कार्य करता है:

  1. एक स्मारक: तुलसीदास के चित्र, उनकी पाण्डुलिपियाँ, और प्रमुख क्षेत्रीय शैलियों में रामचरितमानस के पाठ की एक ऑडियो गैलरी।
  2. एक शोध-संस्थान (शोध-संस्थान): संस्कृत, अवधी, हिन्दी, अंग्रेज़ी और अन्य भाषाओं में रामायण-सम्बन्धित साहित्य का विशाल पुस्तकालय, जहाँ विद्वान और शोध-छात्र आते हैं।
  3. प्रतिदिन रामलीला-स्थल: यहाँ प्रत्येक सन्ध्या लगभग 6:00 बजे से 9:00 बजे तक, वर्ष-भर, निःशुल्क जनता के लिए रामलीला का मञ्चन होता है। दर्शनार्थी भक्त इसे भारत की सबसे प्रामाणिक रामलीला अनुभवों में से एक मानते हैं।

दर्शन

  • समय: संग्रहालय और पुस्तकालय के लिए प्रातः 10:00 बजे से सायं 6:00 बजे तक; रामलीला प्रत्येक सन्ध्या 6:00 बजे से 9:00 बजे तक।
  • भवन मध्य अयोध्या क्षेत्र में है, हनुमान गढ़ी और कनक भवन से पैदल दूरी पर।
  • तुलसी जयन्ती (श्रावण शुक्ल सप्तमी, लगभग जुलाई-अगस्त): तुलसीदास की जन्म-जयन्ती विशेष कार्यक्रमों के साथ मनाई जाती है।
  • विवाह पञ्चमी (नवम्बर-दिसम्बर के अन्त में): राम-सीता विवाह के अवसर पर यहाँ वर्ष की सबसे विस्तृत रामलीला का मञ्चन होता है।
  • संग्रहालय में फ़ोटोग्राफी की अनुमति है किन्तु रामलीला के दौरान नहीं।

समीपवर्ती स्थल

कनक भवन · हनुमान गढ़ी · मणि पर्वत · सरयू

स्रोत एवं सन्दर्भ

  • तुलसीदास: रामचरितमानस (रचना-काल लगभग 1574 ई., अवधी)
  • तुलसीदास: विनय पत्रिका, कवितावली
  • फैज़ाबाद ज़िला गज़ेटियर

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